प्यूपी का ऐतिहासिक कदम
उत्तर प्रदेश ने 2025 में ऊर्जा क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया। गोरखपुर में राज्य का पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट स्थापित हुआ, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। यह प्रोजेक्ट न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे भारत के लिए स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ा बदलाव है।

भारत का लक्ष्य है 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी लाना और 2070 तक नेट-जीरो कार्बन एमिशन हासिल करना। ग्रीन हाइड्रोजन इस लक्ष्य को पाने का सबसे प्रभावी तरीका माना जा रहा है।
ग्रीन हाइड्रोजन क्या है और क्यों है जरूरी?
ग्रीन हाइड्रोजन एक ऐसा ईंधन है जो पानी से इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक द्वारा तैयार होता है। इस प्रक्रिया में बिजली का इस्तेमाल करके पानी को हाइड्रोजन (H₂) और ऑक्सीजन (O₂) में तोड़ा जाता है। अगर यह बिजली नवीकरणीय स्रोतों (सौर, पवन) से आती है, तो इसे ग्रीन हाइड्रोजन कहा जाता है।
फायदे:
- पूरी तरह कार्बन उत्सर्जन-रहित।
- फॉसिल फ्यूल का विकल्प।
- ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता।
ग्रीन हाइड्रोजन की विस्तृत जानकारी पढ़ें
गोरखपुर ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट क्यों खास है?
यह प्लांट Torrent Group द्वारा गोरखपुर में स्थापित किया गया है। यह उत्तर प्रदेश के लिए भविष्य की ऊर्जा क्रांति की शुरुआत है।
मुख्य विशेषताएं:
- इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया से उत्पादन।
- बिजली का स्रोत – सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा।
- हाइड्रोजन का उपयोग – CNG और PNG में मिश्रण, जिससे प्रदूषण घटेगा।
भारत की ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी 2024: क्या कहती है?
भारत सरकार ने 2024 में ग्रीन हाइड्रोजन मिशन लॉन्च किया। इसके मुख्य लक्ष्य हैं:
- 2030 तक 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन।
- ₹19,744 करोड़ का निवेश इस सेक्टर में।
- निर्यात को बढ़ावा देकर भारत को हाइड्रोजन हब बनाना।
- इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी को बढ़ावा।
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टेक्निकल प्रोसेस: ग्रीन हाइड्रोजन कैसे बनता है?
ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया में 3 स्टेप्स होते हैं:
1. इलेक्ट्रोलिसिस
पानी को बिजली से तोड़कर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन अलग किए जाते हैं।
2. स्टोरेज
हाइड्रोजन को हाई-प्रेशर टैंकों में स्टोर किया जाता है।
3. ट्रांसपोर्ट और उपयोग
- CNG और PNG के साथ मिक्स करके गैस नेटवर्क में डाला जाता है।
- फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (FCEVs) में।
- स्टील और सीमेंट उद्योग में।
योगी सरकार की ऊर्जा नीति: 2030 तक बड़ा लक्ष्य
उत्तर प्रदेश सरकार ने अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं:
- 2030 तक 22,000 मेगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य।
- 10 नए ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स शुरू करना।
- सोलर पार्क और बायोएनर्जी प्रोजेक्ट्स का विकास।
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उत्तर प्रदेश के अन्य Renewable Energy प्रोजेक्ट्स
- कानपुर और झांसी में सोलर पार्क प्रोजेक्ट्स।
- वाराणसी में बायो-CNG प्लांट।
- लखनऊ में EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास।
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ग्रीन हाइड्रोजन के फायदे
1. प्रदूषण में कमी
फॉसिल फ्यूल की जगह ग्रीन हाइड्रोजन से वायु प्रदूषण घटेगा।
2. ऊर्जा आत्मनिर्भरता
भारत को पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करनी होगी, ग्रीन हाइड्रोजन इसमें मदद करेगा।
3. रोजगार के अवसर
नई परियोजनाओं से टेक्निकल और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेंगे।
4. उद्योगों में क्रांति
स्टील, सीमेंट, ऑटोमोबाइल सेक्टर को कार्बन न्यूट्रल बनाने में मदद।
चुनौतियां और समाधान
चुनौतियां:
✔ हाई प्रोडक्शन कॉस्ट।
✔ तकनीकी विशेषज्ञों की कमी।
✔ पर्याप्त पानी और ऊर्जा स्रोत की उपलब्धता।
समाधान:
✔ सरकारी सब्सिडी और नीति समर्थन।
✔ प्राइवेट कंपनियों के साथ PPP मॉडल।
✔ R&D में ज्यादा निवेश।
ग्रीन हाइड्रोजन का भविष्य
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, 2030 तक भारत ग्रीन हाइड्रोजन का वैश्विक हब बन सकता है। रेलवे, पावर और ऑटोमोबाइल सेक्टर में इसका इस्तेमाल बढ़ेगा।
ग्लोबल हाइड्रोजन रिपोर्ट देखें
FAQ: लोग अक्सर पूछते हैं
1. ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट कहां है?
उत्तर प्रदेश का पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट गोरखपुर में स्थापित हुआ है।
2. ग्रीन हाइड्रोजन क्यों जरूरी है?
क्योंकि यह कार्बन उत्सर्जन को शून्य करता है और भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाता है।
3. भारत का लक्ष्य क्या है?
भारत 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन का सबसे बड़ा उत्पादक बनने का लक्ष्य रखता है।
निष्कर्ष
गोरखपुर का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की ऊर्जा क्रांति का पहला कदम है। आने वाले समय में यह परियोजना भारत को Net Zero Carbon लक्ष्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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