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Herbalife क्या है? जानिये दुनिया की सबसे न्यूट्रिशन कंपनियों में से एक की पूरी कहानी

Aman Maurya Administrator
जानिये दुनिया की सबसे न्यूट्रिशन कंपनियों में से एक Herbalife की पूरी कहानी विस्तार में

अगर कोई इंटरनेट पर वजन कम करना, सबसे अच्छा प्रोटीन शेक, हेल्दी लाइफस्टाइल या न्यूट्रिशन सप्लीमेंट्स के बारे में खोजबीन करते हैं तो Herbalife कंपनी का नाम ज़रूर सामने आता है क्योंकि यह उन कंपनियों में से है जिनके बारे में लोगों की राय अक्सर एक जैसी नहीं होती। कुछ लोग इसे अपनी फिटनेस जर्नी का अहम हिस्सा बताते हैं, कुछ लोग इसके प्रोडक्ट्स की तारीफ करते हैं जबकि कुछ लोग इसके बिजनेस मॉडल को लेकर सवाल भी उठाते हैं।

Herbalife केवल एक सप्लीमेंट बेचने वाली कंपनी नहीं है। इसके पीछे एक ऐसी कहानी है जिसमें एक युवा उद्यमी का सपना है, अरबों डॉलर का वैश्विक कारोबार है, हजारों स्वतंत्र डिस्ट्रीब्यूटर्स का नेटवर्क है और कई ऐसे विवाद भी हैं जिन्होंने समय-समय पर कंपनी को सुर्खियों में रखा।

आज भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में Herbalife के प्रोडक्ट्स बिकते हैं। अगर कोई भी व्यक्ति कभी Nutrition Club का नाम सुना है, किसी दोस्त को Formula 1 Shake पीते देखा है या सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति को Herbalife बिजनेस के बारे में बात करते देखा है यह सवाल आया होगा कि आखिर Herbalife है क्या और यह इतनी बड़ी कंपनी कैसे बन गई। इस सवाल का जवाब जानने के लिए लगभग 40 साल पीछे जाना होगा।

Herbalife कंपनी का इतिहास

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Herbalife कंपनी की स्थापना 1980 में Mark Hughes नाम के एक अमेरिकी युवा व्यापारी ने की थी। उस समय उनकी उम्र सिर्फ़ 24 साल थी। Herbalife की शुरुआत अपेक्षाकृत साधारण परिस्थितियों में हुई थी।

Mark Hughes अक्सर अपनी मां के बारे में बात करते थे। उनके अनुसार उनकी मां लंबे समय तक वजन से जुड़ी समस्याओं से जूझती रहीं और वजन कम करने के लिए कई अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करती थीं। इसी दौरान उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ा और इस अनुभव ने Mark Hughes पर बहुत गहरा असर डाला। उन्होंने महसूस किया कि बाजार में ऐसे लोगों संख्या बहुत बड़ी है जो अपने वजन और स्वास्थ्य को लेकर परेशान रहते हैं मगर उन्हें भरोसेमंद और आसान समाधान नहीं मिल पाता है।

यहीं से ये विचार पैदा हुआ, उन्होंने सोचा कि क्या ऐसा कोई न्यूट्रिशन उत्पाद बन सकता है जो लोगों को बेहतर पोषण देने के साथ-साथ वजन वजन कम करने व रोकने में भी मदद करे? आज यह कहानी कितनी प्रेरणादायक है और कितनी मार्केटिंग का हिस्सा इस पर लोगों के अलग-अलग विचार है मगर इतना तय है कि Herbalife की शुरुआती ब्रांड पहचान इसी कहानी के आसपास बनी।

शुरुआती दिनों में Mark Hughes के पास कोई भी बड़ा कॉर्पोरेट ऑफिस नहीं था जो लगभग हर बड़े कंपनी के शुरुआत में नहीं होता है। इस कंपनी की भी शुरुआत छोटे स्तर से हुई और कहा जाता है कि शुरुआती बिक्री उनकी कार की डिक्की से होती थी लेकिन लोगों को अपनी बात समझाने की क्षमता बहुत मजबूत थी और यही क्षमता आगे चलकर Herbalife की सबसे बड़ी ताकत भी बनी।

अगर Herbalife सिर्फ शेक बेचती तो हो सकता था कि हजारों अन्य न्यूट्रिशन ब्रांड्स की तरह वो भी बाजार में कहीं खो जाती। इसीलिए कंपनी ने शुरुआत से ही प्रोडक्ट बेचने का तरीका अलग रखा।

आम तरह की कंपनियां अपने उत्पाद दुकानों, सुपरमार्केट या मेडिकल स्टोर्स के माध्यम से बेचती हैं मगर Herbalife ने ऐसा मॉडल चुना जिसमें स्वतंत्र डिस्ट्रीब्यूटर सीधे ग्राहकों तक पहुंचते हैं। इस मॉडल का मतलब था कि कंपनी को हर शहर में अपनी दुकानें खोलने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय ऐसे लोगों को तैयार किया जो खुद उत्पाद इस्तेमाल करते थे और फिर दूसरों को भी उनके बारे में बताते थे जो अभी भी चल रहा लेकिन और भी बड़े स्तर पर। यहीं से Herbalife का विस्तार शुरू हुआ।

1980 और 1990 के दशक में अमेरिका में वजन कम करने और फिटनेस को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही थी। लोग कैलोरी, न्यूट्रिशन और डाइटिंग जैसे विषयों में पहले से ज्यादा रुचि लेने लगे थे और इसी चीज का फायदा Herbalife को मिला।

कंपनी की विचारधारा थी कि बेहतर पोषण, आसान वजन प्रबंधन और एक ऐसा सिस्टम जिसे कोई भी व्यक्ति अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना सकता है समय के साथ-साथ Herbalife अमेरिका से बाहर निकलने लगा।

दुनिया भर में Herbalife का विस्तार कैसे हुआ?

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कंपनी ने पहले उत्तरी अमेरिका में अपनी पकड़ मजबूत की। इसके बाद लैटिन अमेरिका, यूरोप और एशिया के बाजारों में भी फैलने लगा। हर नए देश में कंपनी ने एक जैसी रणनीति रखी। स्थानीय डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क बनाओ, न्यूट्रिशन क्लब तैयार करो और लोगों तक सीधे पहुंचो।

इस रणनीति का बड़ा फायदा यह था कि Herbalife को पारंपरिक विज्ञापनों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ा क्योंकि जब कोई व्यक्ति खुद किसी प्रोडक्ट को उपयोग करता है फिर उसे अपने दोस्तों या परिवार को सुझाता है तो कई सारे लोगों के लिए वह विज्ञापन से ज्यादा भरोसेमंद लगता है। Herbalife ने इसी मनोविज्ञान को अपने बिजनेस मॉडल का हिस्सा बनाया जिससे समय के साथ कंपनी का कारोबार इतना बढ़ा कि वह न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनी बन गई। आज Herbalife का कारोबार अरबों डॉलर में है और इसके उत्पाद दुनिया के ढेर सारे देशों में उपलब्ध हैं। मगर जैसे-जैसे कंपनी बड़ी होती गई वैसे-वैसे उससे जुड़े सवाल भी बढ़ते गए।

कुछ लोगों के मन में ये सवाल है कि क्या Herbalife की सफलता वास्तव में उसके उत्पादों की वजह से है या उसके नेटवर्क मार्केटिंग मॉडल की वजह से। कुछ लोगों ने इसके प्रोडक्ट्स की कीमतों पर सवाल उठाए वहीं दूसरी तरफ लाखों ग्राहक और डिस्ट्रीब्यूटर ऐसे भी थे जो इसे एक सफल और प्रभावी बिजनेस मॉडल मानते थे लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि कंपनी वास्तव में क्या बेचती है।

कई लोग सोचते हैं कि Herbalife सिर्फ वजन कम करने वाला शेक बेचती है मगर सच्चाई ये है कि पिछले चार दशकों में कंपनी ने अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को इतना बड़ा बनाया है कि आज उसके उत्पाद सिर्फ वजन कम (Weight Loss) करने तक सीमित नहीं हैं बल्कि प्रोटीन, स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन, माइक्रोन्यूट्रिएंट सपोर्ट, डाइजेस्टिव हेल्थ, एनर्जी ड्रिंक्स और स्किन केयर तक कंपनी पहुँच चुका है। लेकिन इनमें से कौन से प्रोडक्ट सबसे ज्यादा बिकते हैं, कौन किस उद्देश्य के लिए बनाया गया है और आखिर Herbalife के उत्पाद इतने महंगे क्यों हैं ये सब सवाल कंपनी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा पैदा करता है।

Herbalife कौनसे प्रोडक्ट्स को सबसे ज़्यादा बेचती है?

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अगर कोई Herbalife के बारे में कभी सुनता है तो संभव है कि उसके दिमाग में एक हरा डिब्बा या कोई वजन कम करने वाला शेक (Weight Loss Shake) आए क्योंकि भारत में कंपनी की पहचान काफी हद तक उसके पैकेजिंग और ब्रांडिंग की वजह से बनी है। लेकिन जब कोई Herbalife के पूरे प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को देखता है तो पता चलता है कि कंपनी सिर्फ वजन कम करने वाले शेक ही नहीं बेचती है बल्कि Herbalife व्यक्ति की सुबह की चाय से लेकर उसकी जिम ट्रेनिंग और स्किन केयर तक लगभग हर चीज में अपनी मौजूदगी दर्ज की है।

कंपनी के उत्पादों को समझने का सबसे आसान तरीका है कि उन्हें एक-एक करके देखने के बजाय उस समस्या के आधार पर देखें जिसे वे हल करने का दावा करते हैं। जैसे:

  • कोई व्यक्ति वजन कम करना चाहता है तो ऐसे व्यक्ति को आमतौर पर Formula 1 Nutrition Shake, Personalized Protein Powder और Afresh जैसी चीजें सुझाई जाती हैं।
  • अगर कोई व्यक्ति जिम करता है तो उसे Protein Powder या Sports Nutrition रेंज दिखाई जाती है।
  • अगर कोई व्यक्ति सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की बात करता है तो उसे Multivitamins, Aloe Concentrate या Digestive Support Products की जानकारी दी जाती है।

यही वजह है कि Herbalife का बिज़नेस मॉडल सिर्फ़ एक प्रोडक्ट पर निर्भर नहीं है। कंपनी की कोशिश हमेशा ये रहती है कि ग्राहक को एक पूरा सिस्टम बेचा जाए न कि केवल एक डिब्बा इसीलिए सबसे पहले बात करते हैं उस प्रोडक्ट की जिसने Herbalife को दुनिया भर में पहचान दिलाई।

Formula 1 Shake क्या करता है?

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Formula 1 Nutrition Shake वो प्रोडक्ट है जो Herbalife को पूरे दुनिया भर में फैलाने और पहचान देने का काम किया। ये वही प्रोडक्ट है जिसकी तस्वीरें आपको सोशल मीडिया पोस्ट्स, ट्रांसफॉर्मेशन फोटोज और Nutrition Clubs में सबसे ज्यादा दिखाई देता है।

कई लोग सोचते हैं कि यह कोई जादुई वजन कम करने वाला पाउडर है मगर Formula 1 Shake मूल रूप से एक Meal Replacement Shake है जिसे एक सामान्य भोजन के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति सुबह पराठे, ब्रेड-बटर या अन्य कैलोरी से भरपूर नाश्ता करता है और उसकी जगह नियंत्रित कैलोरी वाला शेक लेता है तो कुल कैलोरी सेवन कम हो सकता है। यहीं से Weight Management की पूरी कहानी शुरू होती है।

ध्यान देने वाली बात ये है कि शेक अपने आप वजन कम नहीं करता बल्कि वजन कम होने का मुख्य कारण आमतौर पर कैलोरी डेफिसिट होता है यानी शरीर जितनी कैलोरी खर्च कर रहा है उससे कम कैलोरी ग्रहण करना होगा। इसीलिए Herbalife के मार्केटिंग मॉडल में Formula 1 को सिर्फ एक आम शेक नहीं बल्कि एक ज़िंदगी बदलने वाले शेक के रूप में पेश किया जाता है। इसी वजह से लाखों लोग इसे खरीदते हैं। मगर कई न्यूट्रिशन विशेषज्ञों का तर्क है कि वही कैलोरी कंट्रोल सामान्य भोजन के जरिए भी किया जा सकता है। दूसरी तरफ Herbalife के प्रोडक्ट्स को इस्तेमाल करने वालों का कहना है कि हर व्यक्ति के पास अपनी डाइट प्लान का समय या ज्ञान नहीं होता इसलिए तैयार शेक उनके लिए आसान विकल्प होता है। दोनों पक्षों की बात में कुछ न कुछ सच्चाई जरूर है।

Personalized Protein Powder क्या काम है?

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अगर किसीने Herbalife का शेक इस्तेमाल करने वाले लोगों से बात की हो तो एक नाम और सुनने को मिलेगा वो है Personalized Protein Powder। अक्सर Formula 1 Shake के साथ यही प्रोडक्ट जोड़ा जाता है। इसके पीछे की वजह है कि सिर्फ Meal Replacement Shake लेने से हर व्यक्ति की जरूरत के अनुसार प्रोटीन की मात्रा नहीं पहुँचती है इसलिए अतिरिक्त प्रोटीन जोड़ने के लिए Protein Powder का इस्तेमाल किया जाता है। भारत में बहुत से लोग मानते हैं कि Protein Powder सिर्फ़ बॉडीबिल्डर्स के लिए होता है लेकिन सच ये है कि प्रोटीन शरीर के लगभग हर हिस्से के लिए जरूरी पोषक तत्व है जैसे कि मांसपेशियां, त्वचा, बाल, रिकवरी और कई जैविक प्रक्रियाएं प्रोटीन पर ही निर्भर करती हैं। Herbalife ने इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए अपने Protein Products को केवल Gym करने वालों तक सीमित नहीं रखा। कंपनी की मार्केटिंग में अक्सर गृहिणियां, ऑफिस कर्मचारी और वरिष्ठ नागरिक भी दिखाई देते हैं। यह रणनीति काफी सफल है क्योंकि इससे प्रोटीन को केवल फिटनेस उत्पाद के बजाय सामान्य स्वास्थ्य उत्पाद के रूप में दिखाया जाता है।

Afresh क्या है और क्यों दिया जाता है?

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भारत में Herbalife का कोई प्रोडक्ट Formula 1 Shake के बाद सबसे ज्यादा Afresh को पहचाना जाता है क्योंकि कई Nutrition Clubs में सुबह-सुबह लोगों को यही पेय दिया जाता है। इसके लोकप्रिय होने का सबसे बड़ी वजह है कि यह भारतीय आदतों के हिसाब से है क्योंकि भारतीयों का चाय से भावनात्मक संबंध है। सुबह की शुरुआत चाय से होती है और दिन में कई बार चाय पी जाती है। Herbalife ने इस आदत को अच्छे से समझा क्योंकि अगर भारत में किसी को सीधे Nutrition Shake दिया जाए तो हो सकता है कि वह उसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा न बना पाए लेकिन अगर उसे चाय जैसा दिखने वाला और चाय की तरह तैयार होने वाला पेय दिया जाए तो वो आसानी से अपने दिनचर्या में शामिल कर लेगा और इसीलिए Herbalife की ये रणनीति भारत में बहुत अच्छी साबित हुई। Afresh को आमतौर पर ऊर्जा, फोकस और एक्टिवनेस के साथ जोड़ा जाता है। हालांकि इसका असर व्यक्ति-व्यक्ति पर अलग हो सकता है।

कुछ लोग इसे पसंद करते हैं क्योंकि ये सामान्य मीठी चाय की तुलना में कम कैलोरी वाला विकल्प है। कुछ लोग इसे सिर्फ स्वाद की वजह से पसंद करते हैं जबकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें इससे कोई विशेष अंतर महसूस नहीं होता यानी इसका अनुभव काफी हद तक व्यक्तिगत होता है।

Aloe Concentrate किस चीज में काम आता है?

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कंपनी ने दावा किया कि Aloe Concentrate ऐसा प्रोडक्ट है जो Digestive Wellness को सपोर्ट करने में मदद करते हैं इसीलिए जब कोई भी Herbalife सिस्टम का हिस्सा बनता है तो अक्सर उसको सिर्फ शेक नहीं सुझाया जाता है बल्कि कई मामलों में Aloe Concentrate जैसे उत्पाद भी बताए जाते हैं। Herbalife सिर्फ़ वजन कम करने पर निर्भर नहीं रहती है बल्कि ग्राहक की सेहत को अच्छा बनाये रखने के लिए अलग-अलग हिस्सों में काम करती है इसलिए Digestive Health, Gut Wellness और Daily Nutrition जैसे चीजों को भी कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो में जोड़ा हुआ है। पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में Gut स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता ने इस तरह के उत्पादों की मांग बढ़ाने में मदद की है। मगर यहां भी वही बात लागू होती है जो लगभग हर सप्लीमेंट इंडस्ट्री पर लागू होता है कि कोई भी उत्पाद संतुलित भोजन और स्वस्थ जीवनशैली का विकल्प नहीं बन सकता। और यहीं से Herbalife की सबसे बड़ी ताकत और आलोचना दोनों सामने आती हैं।

कंपनी स्वास्थ्य को आसान बनाने की कोशिश करती है मगर उसके आलोचकों का कहना है कि स्वास्थ्य को कभी भी सिर्फ डिब्बों और पाउडर में सीमित नहीं किया जा सकता। और शायद इसी बहस ने Herbalife को दुनिया की सबसे चर्चित न्यूट्रिशन कंपनियों में से एक बनाया है।

मगर अभी भी सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर बाजार में प्रोटीन पाउडर, विटामिन और न्यूट्रिशन शेक बेचने वाली दर्जनों कंपनियां हैं तो Herbalife के उत्पाद अक्सर उनसे कहीं ज्यादा महंगे क्यों होते हैं? कंपनी के बिजनेस मॉडल और उसकी असल लागत की कहानी यहीं से शुरू होता है।

Herbalife के प्रोडक्ट्स इतने महंगे क्यों हैं?

अगर कभी Herbalife का कोई प्रोडक्ट खरीदने के बारे में सोचें तो हो सकता है कि कीमत देखकर ही हम इन प्रोडक्ट्स को ना खरीदें भले ही ये प्रोडक्ट्स कितने भी अच्छे हों। ऐसा क्या है कि एक Nutrition Shake, Protein Powder या Tea Mix की कीमत बाजार में बिक रहे दूसरे प्रोडक्ट्स से ज़्यादा महंगी है?

बहुत लोग सोचते हैं कि Herbalife के प्रोडक्ट्स इसीलिए इतने महंगे है क्योंकि कंपनी सिर्फ अपना ब्रांड बेच रही है। कुछ लोगों का कहना है कि कीमत का बड़ा हिस्सा Network Marketing सिस्टम में चला जाता है। वहीं Herbalife के प्रोडक्ट्स को इस्तेमाल करने वालो का मानना है कि कंपनी की रिसर्च, मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी कंट्रोल की वजह से कीमत अधिक है। Herbalife के प्रोडक्ट्स इतने महंगे क्यों है इस चीज को समझने से पहले कंपनी के बिजनेस मॉडल को समझना जरूरी है। जब आप किसी सुपरमार्केट से कोई प्रोडक्ट खरीदते हैं तो उसके पीछे निर्माता, वितरक, थोक विक्रेता और रिटेलर जैसी एक सप्लाई चेन होती है।

Herbalife का मॉडल थोड़ा अलग है क्योंकि यहां बड़ी भूमिका Independent Distributors निभाते हैं। इसका मतलब प्रोडक्ट्स सिर्फ फैक्ट्री से ग्राहक तक नहीं पहुँच रहा बल्कि बीच में एक ऐसा नेटवर्क भी है जो इसे समझता है, प्रमोट करता है और बेचता है। Herbalife बहुत सालों से अपने-आप को एक Premium Nutrition Brand के रूप में दिखाती आई है इसीलिए जब कोई ब्रांड खुद को प्रीमियम श्रेणी में जगह बनाती है तो कीमत सिर्फ सामग्री की लागत से तय नहीं होती बल्कि उसमें ब्रांड वैल्यू, मार्केट पोजिशनिंग और ग्राहक की अपनी धारणा भी शामिल हो जाती है। यही वजह है कि कई बार ग्राहक सिर्फ प्रोडक्ट नहीं खरीद रहा बल्कि उस ब्रांड से जुड़ी एक छवि भी खरीद रहा होता है। अगर अलग-अलग देशों के Nutrition Market को देखें तो ये रणनीति सिर्फ Herbalife ही नहीं लगभग सभी प्रीमियम हेल्थ ब्रांड इसी तरीके से काम करते हैं।

Herbalife के प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता कैसी है?

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Herbalife खुद को एक Science-Based Nutrition Company के रूप में जानी जाती है। ये कंपनी सालों से रिसर्च, वैज्ञानिक सलाहकारों और गुणवत्ता परीक्षणों की बात करती आई है। इसके मार्केटिंग मैटेरियल में अक्सर लैब्स, वैज्ञानिक और न्यूट्रिशन विशेषज्ञ नज़र आते हैं। Herbalife के मुताबिक उसके प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए 300 से अधिक डॉक्टर, वैज्ञानिक और रिसर्च विशेषज्ञ काम करते हैं। कंपनी के अनुसार दुनिया भर में बिकने वाले उसके प्रोडक्ट्स के लिए एक समान Quality Standards लागू होता है ताकि अलग-अलग देशों में भी गुणवत्ता का स्तर बना रहे।

प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले Ingredients को सीधे उपयोग नहीं किया जाता बल्कि पहले उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच की जाती है। कंपनी कहती है कि सिर्फ Approved Suppliers से ही कच्चा माल खरीदा जाता है और उसे कई तरीकों के परीक्षणों से गुजरता पड़ता है।

भारत में Herbalife के प्रोडक्ट्स ऐसी मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं में बनाए जाते हैं जो International cGMP (Current Good Manufacturing Practices) Standards का पालन करती हैं। इसके अलावा कंपनी से जुड़े कई उत्पादन केंद्र और प्रयोगशालाएं HACCP, ISO 22000, FSSC 22000, ISO 17025 और NSF जैसे अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता एवं खाद्य सुरक्षा प्रमाणनों के अनुरूप काम करते हैं।

Herbalife “Seed to Feed” Quality Control System की बात करती है जिसका मतलब है कि कच्चे माल के स्रोत से लेकर तैयार उत्पाद के ग्राहक तक पहुंचने तक हर चरण की निगरानी और परीक्षण किया जाता है। इस प्रक्रिया में Physical, Chemical और Microbiological Testing शामिल होती है ताकि प्रोडक्ट कंपनी के गुणवत्ता मानकों के साथ-साथ सरकारी सुरक्षा नियमों को भी पूरा कर सके।

भारत में बिकने वाले Herbalife उत्पादों के लिए FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) के नियमों का पालन करना भी अनिवार्य है। कंपनी का कहना है कि उसके प्रोडक्ट्स की जाँच सिर्फ गुणवत्ता के लिए ही नहीं बल्कि सुरक्षा और लेबल पर दिए जाने वाली जानकारी की सटीकता सुनिश्चित हो।

अगर प्रोडक्ट्स से मिलने वाले परिणामों को देखें तो ज़्यादातर मामलों में परिणाम व्यक्ति की कुल जीवनशैली पर निर्भर करता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई इंसान पहले रोजाना जंक फूड खा रहा था, शारीरिक गतिविधि नहीं कर रहा था और फिर उसने नियंत्रित डाइट, नियमित वॉक और Herbalife सिस्टम को अपनाए तो उसके परिणाम अच्छे दिख सकते हैं मगर ऐसे परिणामों का पूरा श्रेय सिर्फ़ Herbalife को देना सही नहीं होगा। इसी वजह से Nutrition Experts अक्सर कहते हैं कि किसी भी सप्लीमेंट को उसके मूल बिंदु के आधार पर समझना चाहिए। Herbalife के साथ भी यही बात लागू होती है।

Herbalife Nutrition Clubs में क्या होता है?

भारत में Herbalife की लोकप्रियता का एक बड़ी वजह वे Nutrition Clubs हैं जिनके बारे में ढेरों लोग जानते तो हैं मगर पूरी तरह समझ नहीं पाते। पहली नजर में ये जगहें किसी कैफे जैसी लग सकती हैं।

लोग वहां आते हैं, शेक पीते हैं, चाय जैसा पेय लेते हैं, अपने वजन की जांच करवाते हैं और कई बार स्वास्थ्य से जुड़ी चर्चाओं में भी भाग लेते हैं। लेकिन इन क्लब्स का महत्व सिर्फ प्रोडक्ट्स बेचने तक का नहीं है असल में यही Herbalife के सबसे शक्तिशाली मार्केटिंग टूल्स में से एक हैं।

जब कोई नया व्यक्ति इन न्यूट्रीशन क्लब्स में आते हैं तो वो सिर्फ एक शेक नहीं देखता बल्कि वो ऐसे लोगों को देखता है जो अपने वजन घटाने या फिटनेस लक्ष्यों के बारे में बात कर रहे होते हैं। इसी वजह से Herbalife का मॉडल सिर्फ और सिर्फ सप्लीमेंट बेचने पर आधारित नहीं है बल्कि एक समुदाय बनाने पर भी आधारित है। यही वो वजह है जिसने Herbalife को जितना ऊपर ले गया उतना ही विवादित बना दिया।

Herbalife में MLM मॉडल की कहानी

Herbalife कंपनी का दूसरा भाग इसका Business Opportunity Model है और यही वो भाग है जहां से Multi-Level Marketing यानी MLM की चर्चा शुरू होती है। Herbalife के सिस्टम में सिर्फ प्रोडक्ट्स ही नहीं ख़रीद सकते हैं बल्कि एक डिस्ट्रीब्यूटर बनकर प्रोडक्ट्स को बेच भी सकते हैं।

इसमें ज़्यादा कुछ नहीं करना है बस प्रोडक्ट्स को खरीदना है और इस्तेमाल करना है इसके बाद कोई डिस्ट्रीब्यूटर बनकर काम करना चाहता है तो उसको एक डिस्ट्रीब्यूटर आईडी दिया जाता है फिर अगर कोई उस डिस्टीब्यूटर आईडी के ज़रिए प्रोडक्ट्स खरीदता है तो कुछ कमीशन मिलता है।

2010 में Herbalife पर सबसे ज्यादा ध्यान तब गया जब कुछ निवेशकों और वित्तीय विश्लेषकों ने कंपनी के मॉडल पर गंभीर सवाल उठाने लगे और उनका कहना था कि कंपनी की असली ताकत उत्पादों की बिक्री नहीं बल्कि लगातार नए डिस्ट्रीब्यूटर्स जोड़ने की प्रक्रिया है जबकि Herbalife ने हमेशा कहा कि उसका व्यवसाय असल प्रोडक्ट्स की बिक्री पर आधारित है और लाखों ग्राहक उसके प्रोडक्ट्स को इस्तेमाल करते हैं मगर ये बहस धीरे-धीरे इतना बड़ा हुआ कि मामला अमेरिका की सरकारी एजेंसियों तक पहुंच गया और 2016 में अमेरिकी Federal Trade Commission (FTC) और Herbalife के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ। इस समझौते के तहत कंपनी को अपने कुछ बिजनेस प्रैक्टिस में बदलाव करने पड़े और आर्थिक भूटान भी करना पड़ा। हालांकि FTC ने Herbalife को आधिकारिक रूप से कोई पिरामिड स्कीम घोषित नहीं किया था बस जांच के दौरान कंपनी के कुछ दावों और व्यावसायिक तरीकों पर सवाल उठाए थे। इसके बाद Herbalife ने अपने सिस्टम में बहुत बदलाव किया और ये दिखाया कि उसकी आय असल उत्पाद बिक्री पर आधारित है।

Herbalife के प्रोडक्ट्स को कौन-कौन लोग प्रमोट करते हैं?

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Herbalife ने बहुत पहले समझ चुका था कि अगर खुद को सिर्फ Weight Loss Brand की छवि से बाहर निकालना है तो उसे Performance Nutrition के दुनिया में भी एक मजबूत पहचान बनानी होगी। इसीलिए कंपनी ने सालों तक बहुत-से अंतरराष्ट्रीय एथलीट्स, खेल संगठनों और टीमों के साथ साझेदारी की और सबसे प्रसिद्ध नामों में से एक फुटबॉल खिलाड़ी Cristiano Ronaldo इस कंपनी के ब्रांड एंबेसडर हैं। शायद इसी वजह से Herbalife को दुनिया भर में करोड़ों लोगों तक पहुंचाने में मदद मिली और उनके ज़रिए अपने ब्रांड यानी कंपनी Herbalife को एक अच्छे ढंग से प्रमोट किया जिससे इसकी वैल्यू और भी ज़्यादा बढ़ गई लेकिन भारत में उतना नहीं जितना बाहरी देसों में प्रमोट हुआ क्योंकि भारत में फुटबॉल कम और क्रिकेट ज़्यादा पसंद किया जाता है इसीलिए भारत में प्रमोट करने के लिए कंपनी ने कुछ बहुत प्रसिद्ध खिलाड़ियों को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया जिसे भारत में बहुत ज़्यादा पसंद करते हैं और इसमें सबसे बड़ा नाम विराट कोहली का है और वही Herbalife के प्रमुख ब्रांड एंबेसडर हैं फिर महिला खिलाड़ी स्मृति मंधाना उसके बाद टेबल टेनिस की खिलाड़ी मनिका बत्रा भी इससे जुड़े हैं।

इसके अलावा कंपनी ने कई खेल टीमों और स्पोर्ट्स इवेंट्स को भी स्पॉन्सर किया जिससे इसकी पहचान एक डायटिंग कंपनी से आगे बढ़कर स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन ब्रांड के रूप में भी बन गई।

Herbalife भारत देश में इतना क्यों लोकप्रिय है?

Herbalife के लिए भारत देश एक महत्वपूर्ण बाजार है। इसके पीछे वजह सिर्फ़ और सिर्फ़ जनसंख्या नहीं है बल्कि बदलती जीवनशैली है। पिछले 20 सालों में भारत में फिटनेस, जिम, वेट लॉस और हेल्थ सप्लीमेंट्स का बाजार तेजी से बढ़ा है। पहले जहां लोग सिर्फ तबीयत ख़राब होने पर ही अपनी सेहत के बारे में सोचते थे वहीं अब अधिकतर लोग सचेत ढंग से फिट रहने की कोशिश करते हैं।

Herbalife ने इस बदलाव को बहुत जल्द पहचान लिया और कंपनी ने बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों तक अपना नेटवर्क फैलाया फिर Nutrition Clubs, Independent Distributors और Word-of-Mouth Marketing की भी एक अच्छी भूमिका है।

निष्कर्ष: क्या Herbalife के प्रोडक्ट खरीदने चाहिए?

ये सवाल हो समता है पूरे लेख का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है जिसका कोई ऐसा जवाब नहीं है जो सबके लिए सही हो। अगर कोई ये आशा करे कि बस Herbalife का शेक पीने से और बिना अपने जीवनशैली या आदतों में बदलाव करे उसका वजन कम हो जाएगा तो वो बिल्कुल ग़लत है। वहीं अगर कोई संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और नियंत्रित कैलोरी सेवन के साथ इन प्रोडक्ट्स को इस्तेमाल करता है तो उसे बहुत अच्छा परिणाम देखने को मिलता है।

अगर Herbalife के MLM मॉडल की बात करें तो किसी भी MLM या Direct Selling मॉडल में घुसने से पहले अपनी उत्साह से ज्यादा तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि सिर्फ कंपनी की सफलता के बारे में जानना काफ़ी नहीं है बल्कि ये समझना भी जरूरी है कि असल में कितने लोग लगातार पैसा कमा पाते हैं और इसके लिए कितना समय, मेहनत और नेटवर्क बनाने की ज़रूरत है।

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