
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय शुक्रवार को करूर पहुंचे, जहां उन्होंने पिछले साल हुई दर्दनाक भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात की। यह हादसे के बाद उनका पहला करूर दौरा था और इस दौरान उनका भावुक अंदाज चर्चा का विषय बन गया। मंच से संबोधित करते हुए विजय ने कहा कि जीवन में इंसान कितनी भी बड़ी सफलता हासिल कर ले, लेकिन कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो कभी खत्म नहीं होते। उन्होंने करूर भगदड़ को अपने राजनीतिक जीवन ही नहीं, बल्कि निजी जीवन का भी सबसे बड़ा घाव बताया।
करूर के एटलस ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों के कुछ सदस्यों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र भी सौंपे। यह नियुक्तियां मद्रास हाईकोर्ट की अनुमति के बाद अस्थायी रूप से दी गई हैं, क्योंकि मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
करूर भगदड़ को लेकर क्या बोले मुख्यमंत्री विजय?
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने सितंबर 2025 में हुई उस घटना को याद करते हुए कहा कि उस दिन को वह कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने कहा कि हादसे में कई मासूम लोगों ने अपनी जान गंवाई और यह दर्द आज भी उनके दिल में जिंदा है।
विजय ने कहा कि जब वह नमक्कल से करूर के लिए रवाना हुए थे, तब अगर प्रशासन को भीड़ को लेकर किसी तरह की आशंका थी तो उन्हें पहले ही चेतावनी दी जा सकती थी। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले एक अन्य कार्यक्रम में पुलिस ने अधिक भीड़ का हवाला देकर कार्यक्रम स्थगित करने की सलाह दी थी और उन्होंने बिना किसी विवाद के उसे स्वीकार भी किया था। ऐसे में उनका सवाल था कि करूर में वही सावधानी क्यों नहीं बरती गई।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने उस समय स्थानीय प्रशासन पर पूरा भरोसा किया था। उनके मुताबिक, यदि पुलिस को हालात बिगड़ने की आशंका थी तो कार्यक्रम को रोका या रद्द भी किया जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे के बाद उन्हें ही जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की गई, जबकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होना ज्यादा जरूरी था।
हालांकि, मुख्यमंत्री के ये आरोप उनका पक्ष हैं। इस मामले में विपक्ष और तत्कालीन प्रशासन पहले भी इन आरोपों से इनकार करता रहा है। पूरे मामले की जांच और इससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर प्रक्रिया अभी भी जारी है।
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करूर हादसा क्यों बना तमिलनाडु की राजनीति का बड़ा मुद्दा?
सितंबर 2025 में TVK की एक राजनीतिक रैली के दौरान करूर में भारी भीड़ उमड़ने से भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में 41 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। घटना के बाद भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर कई सवाल उठे। जांच एजेंसियों ने आयोजन और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच शुरू की, वहीं राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया।
करूर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस त्रासदी को केवल एक हादसे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इससे भविष्य के लिए सबक लेने की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
अपने संबोधन के अंत में विजय ने कहा कि राजनीति उनके लिए सत्ता या व्यक्तिगत लाभ का माध्यम नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य जनता की सेवा करना है और किसी भी तरह के दबाव या आरोपों से वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि करूर हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की याद हमेशा जीवित रहेगी और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाती रहेगी।
